है गुजारिश यही शिर्डी वाले

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॥ पावन पाठ ॥

है गुजारिश यही शिर्डी वाले मेरी तेरे दर पे युही आता जाता रहू,

हो तुम्हारे चरण हो सिर मेरा हर घड़ी चरणों में सिर झुकाता रहू

है गुजारिश यही शिर्डी वाले मेरी तेरे दर पे युही आता जाता रहू,

चाहे गम हो मुझे चाहे मुझको ख़ुशी चाहे जिस हाल में हो मेरी जिन्दगी

मैं जुबा से तेरा नाम हटने न दू,तेरी महिमा का गुणगान गाता रहू

हो तुम्हारे चरण हो सिर मेरा हर घड़ी चरणों में सिर झुकाता रहू

अब सिवा तेरे कुछ भी नही भाता है देखता हु याहा तू नजर आता है,

उम्र जब तक रहे सांस जब तक चले सांसो में तेरा नाम बसाता रहू

हो तुम्हारे चरण हो सिर मेरा हर घड़ी चरणों में सिर झुकाता रहू

तेरे सुन्दर छवि मैं निहारु सदा क्या व्यान मैं करू तू है सब से जुदा

मेरी हसरत है ये तेरी रेहमत मिले तेरी रेहमत पे खुद को लुटाता रहू

हो तुम्हारे चरण हो सिर मेरा हर घड़ी चरणों में सिर झुकाता रहू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।