नंदी भरंगी नाच रहे देखो गनपत पधारे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नंदी भरंगी नाच रहे देखो गनपत पधारे

गनपत पधारे गोरी ललना पधारे

शिव घन मिठाई बाँट रहो देखो गनपत पधारे

शिव ने घज का शीश लगाया

प्रथम पूज तुम को बनवाया

घनो का इश बनाये रहे देखो गूंजे जयकारे

नंदी भरंगी नाच रहे देखो गनपत पधारे

ब्रह्मा ने वेद दिए ज्ञान भरमानी

लक्ष्मी लुटाई धन और धानी इन्दर एह रावत लाये रहे और वज्र भी लाये

नंदी भरंगी नाच रहे देखो गनपत पधारे

शिव गोरा के लाल हो प्यारे

भव से देवा पार उतारे चन्दन शीश झुकाए रहे

देखो चरणों में थारे

नंदी भरंगी नाच रहे देखो गनपत पधारे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।