रहना तू युही मेरे साथ में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नैना मिले हैं तुमसे जब से

मैं तो जोगन तेरी हो गयी

कान्हा तू हैं मुझको भाया

दिल धड़कन में तू ही समाया

तेरी प्रीत में ऐसे खो गयी

तेरी आदा तो सबसे जुदा हैं

दिल पे तेरा नाम लिखा हैं

अब तो मेरी जिंदगी हैं तेरे हाथ में

ओह्ह मेरे श्याम सुनले ओह्ह मेरे घनश्याम

रहना तू युही मेरे साथ में

तू ही हैं धड़कन में आँखों में तू

बसता हैं तू अब तो मेरी सांस में

ओह्ह मेरे श्याम

ये बहरे ये नज़ारे कुछ नहीं हैं बिन तुम्हारे

तेरे बिन ये लगते फीके तू बतादे मैं क्या करू

कोई वीरा अब नहीं हैं इस जहा में कुछ सहारा

मांझी तू ही श्याम मेरा

तू ही बता दे मैं क्या करू

मेरे दिल की तुझको पता हैं

जानती ये दुनिया क्या हैं

काम तू ही आया तनहा रात में

ओह्ह मेरे श्याम सुनले ओह्ह मेरे धनश्याम

रहना तू युही मेरे साथ में

तू ही हैं धड़कन में आँखों में तू

बसता हैं तू अब तो मेरी सांस में

ओह्ह मेरे श्याम …..

मैं दिवानी ये न जानी

मैंने लोगो कि ना मानी

ये देते मुझको ताने

मुझको परवाह ही नहीं

मैंने अपना तुमको माना

साथ तेरा ये पहचाना

नजरो को अब जचता

कोई दूसरा ही नहीं

मेरे दिल की ये सदा हैं

हो सकता तू न जुदा हैं

इतनी हैं सच्चाई मेरी बात में

ओह्ह मेरे श्याम सुनले ओह्ह मेरे धनश्याम

रहना तू युही मेरे साथ में

तू ही हैं धड़कन में आँखों में तू

बसता हैं तू अब तो मेरी सांस में

ओह्ह मेरे श्याम …..

तेरे दर के बनके दासी

पूजा करती हु तुम्हारी

तेरे चरणों को छोड़कर मैं जाउंगी नाही

दुनिया रूठे रिश्ते टूटे

मुझको लगते झूटे

नाम तेरा मैं कान्हा मैं बिसराऊंगी नहीं

रंग तेरा मुझपे चढ़ा हैं

अपनी हद से आगे बड़ा हैं

कुछ नहीं हैं मुरली वाले मेरे हाथ में

ओह्ह मेरे श्याम सुनले ओह्ह मेरे धनश्याम

रहना तू युही मेरे साथ में

तू ही हैं धड़कन में आँखों में तू

बसता हैं तू अब तो मेरी सांस में

ओह्ह मेरे श्याम …..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।