सुन सुन रै सतसंग री बातां

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

एक घड़ी आधी घड़ी और आधी में पूनी आध,

तुलसी सत्संगत संत की मिटे करोड़ अपराध,

तपस्या बरस हजार की सतसंग की घड़ी एक,

तो भी बराबर ना तुले मुनि सुखदेव की विवेक

सुन सुन रै सुन सुन रै,

सुन सुन रै सतसंग री बातां,

जनम सफल हो जावेला,

राम सुमिर सुख पावेला

सत री संगत में नित रो आणों,

सत शब्दा को ध्यान लगाणों,

सुणियाँ पाप कट जावेला,

राम सुमर सुख पावेला,

सुन सुन रै सुन सुन रै,

सुन सुन रै सतसंग री बातां,

जनम सफल हो जावेला,

राम सुमिर सुख पावेला

सत री संगत में सतगुरु आसी,

प्रेम भाव रस प्याला प्यासी,

पिया अमर हो जावेला,

राम सुमर सुख पावेला,

सुन सुन रै सुन सुन रै,

सुन सुन रै सतसंग री बातां,

जनम सफल हो जावेला,

राम सुमिर सुख पावेला

चेत चेत नर चेतो कर ले,

राम नाम की बाळद भर ले,

खर्च बिना काई खावे ला,

राम सुमर सुख पावेला,

सुन सुन रै सुन सुन रै,

सुन सुन रै सतसंग री बातां,

जनम सफल हो जावेला,

राम सुमिर सुख पावेला

दास भगत थाने दे रहा हेला,

अबके बिछड्या फेर ना मिलाला,

फेर पछे पछतावोला,

राम सुमर सुख पावेला,

सुन सुन रै सुन सुन रै,

सुन सुन रै सतसंग री बातां,

जनम सफल हो जावेला,

राम सुमिर सुख पावेला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।