नजर कदे न लागे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नजर कदे न लागे तेरे नजर कदे न लागे

लै बनया दूज का चाँद बाबा नजर कदे न लागे

नजर कदे न लागे तेरे नजर कदे न लागे

तने खड़ा निहारे जाट बाबा नजर कदे न लागे

मैं हरयाने से आया तेरा रूप देख के टकराया

तेरी बांकी टेढ़ी चितवन मेरा हिवड़ा बहुत लुभाया

तेरे घने निराले ठाठ बाबा नजर कदे न लागे

या मकराने की कोठी तेरी आख्या मोटी मोटी,

हूँ कैसे होले होले भगता पर फेंके गोटी,

सोहे मोरछडी तेरे हाथ बाबा नजर कदे न लागे

तने देख सलोना मेरी हिल गई रे पोरी पोरी,

इब जन्म जन्म की बाबा तेरे से बंध गई गोरी

ते बहुत घना फुरांत बाबा नजर कदे न लागे

काला टिका लग वा ले निम्भु मिर्ची बंधवा ले

एह हर्ष संवारा खुद ने नजरा से आज बचा ले

तेरे रुतबे की क्या बात बाबा नजर कदे न लागे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।