ओ पालनहारे तू ही न सुनेगा फिर कौन सुने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओ रे जगदीश तू है कहाँ मुश्किलों में है तेरा जहां

हर तरफ आफतों का पता राहतों का ठिकाना बता

ओ रे मुरलीवाले तेरे हैं हम सारे

तुम ही हो रखवाले

ओ पालनहारे निर्गुण और न्यारे

तुम्ही ना सुने तो फिर कौन सुने

हमरी उलझन सुलझाओ भगवन

तुमरे बिना संकट कौन हारे

ऐसे हालातों से हम कैसे लड़ें

ये समय चल रहा पर हम वहीँ हैं खड़े

साड़ी नाकाम सी लग रही कोशिशें

अब भला हम करें तो फिर बता क्या करें

आस बस तेरी लिए जी रहे हैं

तेरी ही कृपा की हमें आस रे

तू जीवन दाता तू ही विधाता

उम्मीदें भला फिर किस से करें

ओ पालनहारे...............

फिर से ये ब्रज तेरा संकट से घिरा

हे यशोदा के प्यारे दुलारे सुनो

क्यों भला हारती ये धरा भारती

तेरी गीता तुझे फिर पुकारे सुनो

ग्वाल बाल तेरे हुए है हैं अधीरे

तुझसे ही अर्ज़ी गुज़ारिश सुनो

आओ नन्द लाला गोलू के गोपाला

देखे तेरे राहें हम खड़े खड़े

ओ पालनहारे................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।