चालो देखण ने बाई सा थारो बीरो नाचै रै

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॥ पावन पाठ ॥

चालो देखण ने बाई सा थारो बीरो नाचै रै,

चालो देखण ने चालो देखण ने बाईसा,

थारो बीरो नाचे रे बीरो नाचे रै,

के थारो भाई नाचे रै चालो देखण ने,

आ रसियाँ की टोळी देखो ढोलक चंग बजावे है,

घूमर घाले साहिबो यूँ लुळ लुळ नाचे रै,

चालो देखण ने चालो देखण ने बाई सा,

थारो बीरो नाचै रै चालो देखण ने

बणकर बीन्द सेवरो बांध्यो,

रंग में भरया बाराती रे

मूंछ्यां वाळी बींदणी के सागे नाचे रै,

चालो देखण ने चालो देखण ने बाई सा,

थारो बीरो नाचै रै चालो देखण ने।

चार तो चंगा की टोल्या बाजारां में बाजे रै,

गोखां बैठी गोरड़्या घूँघट से झांके रै,

चालो देखण ने चालो देखण ने बाई सा,

थारो बीरो नाचै रै चालो देखण ने

चार तो चंगां की जोड्या,

बागां में ही बाजे रे

फुलड़ा चुगती गोरड़्या,

चंगा पर नाचे रै चालो देखण ने बाई सा,

थारो बीरो नाचै रै चालो देखण ने

चालो देखण ने बाईसा थारो बीरो नाचे रे,

चालो देखण ने बीरो नाचे रे,

कि थारो भाई नाचे रे चालो देखण ने,

चालो देखण ने बाई सा थारो बीरो नाचै रै,

चालो देखण ने चालो देखण ने बाईसा,

थारो बीरो नाचे रे बीरो नाचे रै,

के थारो भाई नाचे रै चालो देखण ने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।