मेरे मोहन बाबा आजा कुटिया में गरीब की

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे मोहन बाबा आजा कुटिया में गरीब की

तू खोल दे आकर कुंडी मेरे नसीब की

तेरे दर पे चलते चलते मैं हार गयी देखो

इतने दुखो की कठिन परीक्षा मार गयी देखो

कही दवा मिलै ना बाबा तेरे मरीज की

भादोव के महीने में बाबा तेरा मेला भारी है

दर्शन को जाते बाबा लाखो नर नारी है

तुम सुनलो विनती बाबा मुझ बदनसीब की

तुम हो बड़े महान बाबा सबके हितकारी

टुकड़े उसी के टूर करते जो हो भिखारी

सहदेव शर्मा ने देखि है कृपा अजीब सी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।