रब केहन नालो माँ केहना सिखिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जदों मुहो किसे दा मैं ना लेना सिखिया

रब केहन नालो माँ केहना सिखिया

गल नही सी आउंदी मुहो बोलना नही आउंदा सी

ओहदों केहा माँ जदों बोलना नही आउंदी सी

पैरा उते बैठन तो पैरा ते खलोन तक माँ मेरी सूती नही सी कदे मेरे सोन तक

वखरी रहमत ते सुख अनमोल ऐ,

माँ जिहदे कोल हुंदी रब ओहदे कोल ऐ,

जिहदे हथ फड के मैं तुरना सिखिया

रब केहन नालो माँ केहना सिखिया

जांदी एह पैगमभरा दी गल दो जहान ते माँ दी आवाज जावे सत आस्मान ते

पीरा ते फकीरा ने भी गल माँ दी मोड़ी न

माँ दी दुआ वाली कंध किसे तोड़ी न

माँ दी हवा वाला बुहा रब ढोवे न

इक पल किसे कोलो माँ दूर हॉवे न जिहदे साहा नाल लैके साह लैना सिखिया

रब केहन नालो माँ केहना सिखिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।