ना मिल पाते सिया रघुवर जो बजरंगी नही होते

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ना मिल पाते सिया रघुवर जो बजरंगी नही होते,

भटकते राम जी दर दर जो बजरंगी नही होते

ना मिल पाते सिया रघुवर जो बजरंगी नही होते

ना जाते राम किश किन्दा न वध हो पाता बाली का,

किरपा न होती सुगरीव पर जो बजरंगी नही होते

ना मिल पाते सिया रघुवर जो बजरंगी नही होते

ना रेहती उर्मिला सुहागिन अकेले रेह जाते रघुवर,

लखन जी पाते न पल भर जो बजरंगी नही होते

ना मिल पाते सिया रघुवर जो बजरंगी नही होते

न जलती लंका रावण की ना जाती लंकनी मारी

अमर रेहता वो दश कंदर जो बजरंगी नही होते

ना मिल पाते सिया रघुवर जो बजरंगी नही होते

अनाडी सच कहे मेहरा न बनता पुल समन्दर पर,

तैरते ने कभी पत्थर जो बजरंगी नही होते

ना मिल पाते सिया रघुवर जो बजरंगी नही होते

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।