आवागे हर साल बाबा जी तेरे आवागे

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॥ पावन पाठ ॥

आवागे आवागे हर साल बाबा जी तेरे आवागे

पावागे पावागे दर भंगडे बाबा जी तेरे पावांगे,

चेत महीने चाला आया मन दर्शन नु है ललचाया

असी चल आइये दरबार बाबा जी तेरे आवागे

हेठ गरुने लाके ताड़ी जपदे प्रभु दी महिमा प्यारी

तुसी दो संगता नु प्यार बाबा जी तेरे आवा गे

श्रधा दे नाल रोट बनाइए दर ते आके भोग लगाई ये

नाडा घड वाला होया निहाल बाबा जी तेरे आवागे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।