दान दई जै अमारू रै

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैयारी बहु मदमती ते माही वेचवा जाए,

आडो ऊबो कानजी काड़ो,

रोकी मारग माय अबला रेने ऊबी रै,

जोऊ तारी सबड़ सुबी रे

माहि नित वेचो तमारु,

दान दई जै अमारू रै,

अमे मैयारी कंश नी काना देइये ना केने दान,

जाज्यो जोर माँ करजो काना करसु कंश ने जान,

बढ़ बढ़ बोलतो आयो काना बढ़ क्याठी लावयो रै,

नाथ तन्ने जानिये नीके भागी आव्यो कंश नी बीखे रै,

कंश ने जाइ कीने कामनी जेने बड़े तू बोल,

दान लीधा बिना नहीं दैउ जाबा,

करीस थारो तो अबला रेने ऊबी रै,

जोऊ तारी सबड़ सुबी रे माहि नित वेचो तमारु,

दान दई जै अमारू रै

कान्हां राते मथुरा मिली कंश नी बिखे काल,

कीड़ी मायेथी कुंजर काना आज थयो नंदलाल,

बढ़ बढ़ बोलतो आयो काना बढ़ क्याथी लायो रै,

नाथ तन्ने जाणिये नीके भागी आव्यो कंश नी बिखे रै।

कानजी कहे कामनी तू तो बोल विचारी बैन,

मईड़ा तारा लेइस लूटी निरे भर आइसे नैन,

अबला रेने ऊबी रै जोऊ तारी सबड़ सुबी रे,

माहि नित वेचो तमारु दान दई जै अमारू रै

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।