छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज

गोवर्धन महाराज, हमारे प्रभु गोवर्धन महाराज,

छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज

मानसी मानसी गंगा को असनान,

धरो फिर चकलेश्वर को ध्यान,

दान घाटी में दही को दान,

करो परिक्रमा की तैयारी है गोवर्धन महाराज,

छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज

इंद्र को मन मर्दन कीन्हो डूबत बृज को बचाय लीन्हो,

प्रकट भये है दर्शन दीन्हो श्री नटवर की महिमा न्यारी है,

गोवर्धन महाराज

छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज

भक्त जन पड़े रहे चहुँ और,

संतजन पड़े रहे चहुँ और,

देख के ध्यान धरे नित घोर,

शिखर के ऊपर नाचत मोर,

कर रहे हैं बृज की रखवारी है गोवर्धन महाराज,

छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज

धन्य जो बात करें गिरिराज,

सिद्ध हो उनके बिगरे काज,

लाज भक्तन की रखे गिरिराज,

श्याम तेरे चरणन की बलिहारी है गोवर्धन महाराज,

छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज

मानसी गंगा श्री हरिदेव गिरीवर की परिक्रमा देव,

छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।