भली करी गुरु दाता

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॥ पावन पाठ ॥

भली करी गुरु दाता,

जीव राखीयो, चौरासी में जाता,

भूलूँ नहीं लाखों बाता,

म्हारे गुरु वचनो रा नाता

करम गळी में आयो,

कर्मा सूं काठो कळायो,

गुरु बचा लियो दोन्यू हाथां,

म्हारे गुरु वचनो रा नाता

भूलूँ नहीं लाखों बाता,

म्हारे गुरु वचनो रा नाता

पगों थको पौंगलीयो,

म्हारो सतगुरु हेलो सम्भलीयो,

म्हे तो अधबल में रह जाता,

म्हारे गुरु वचनो रा नाता,

भूलूँ नहीं लाखों बाता,

म्हारे गुरु वचनो रा नाता

आंख्या थका अंधारो,

गुरु भूंडो हाल हमारो,

आंख्या थका अंधारो,

गुरु भूंडो हाल हमारो,

सतसंग रा खेल बताया,

म्हारे गुरु वचनो रा नाता,

भूलूँ नहीं लाखों बाता,

म्हारे गुरु वचनो रा नाता

मोह माया री लगी है भारी,

जिनमे बह गया कई बारी,

गुरु बचा लियो बह जाता,

म्हारे गुरु वचनो रा नाता,

भूलूँ नहीं लाखों बाता,

म्हारे गुरु वचनो रा नाता

सतगुरु सैण बताई,

सत सिमरत राम सुधि पाई,

गुरु शरणों में म्हारा माथा,

म्हारे गुरु वचनो रा नाता,

भूलूँ नहीं लाखों बाता,

म्हारे गुरु वचनो रा नाता।

भली करी गुरु दाता,

जीव राखीयो, चौरासी में जाता,

भूलूँ नहीं लाखों बाता,

म्हारे गुरु वचनो रा नाता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।