थाने काजलियो बना ल्यूं राज

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॥ पावन पाठ ॥

थाने काजलियो बना ल्यूं राज,

पलकां में बंद कर राखुली,

ओ राज, राज, पलका में बंद कर राखुली,

थाने कालजीयो बणाल्यूँ,

म्हारें नैना में रमाल्यु राज,

पलका में बंद कर राखूली,

राज, पलका में बंद कर राखुली।

गौरी पलका में नींद कइयाँ आवेली, आवेली ,

गोरी पलका में नींद किया आवेली,

म्हारी पलका पालणियां झुलावेली,

झुलावेली म्हारी पलका पालनिए झुलावेली,

म्हारे हिवड़ा दूर दूर कइयाँ जावेला जी,

थाने चंदन हार बणाल्यूँ,

थाने हिवड़े सू लगा ल्यूं,

चुनरी में लूकाय थाने राखूली,

थाने कालजीयो बणाल्यूँ,

म्हारें नैना में रमाल्यु राज,

पलका में बंद कर राखूली,

राज, पलका में बंद कर राखुली।

ओ राज़, पलकां में बंद कर राखूंली।

गोरी चुनरी लहर लहरावेली, लहरावे,

गोरी चुनरी लहर लहरावेली,

भोले प्राणा में प्रीत जगावेली,

ओ म्हारे नैना सू दूर दूर कइया जावोला जी

ढोला किया ज़वोला

थाने मोतीडो बणाल्यु,

म्हारी नथनी में जड़ाल्यु

घूँघट में छुपाय थाने राखूली,

ओ, घूँघट में छुपाय थाने राखूली

थाने कालजीयो बणाल्यूँ,

म्हारें नैना में रमाल्यु राज,

पलका में बंद कर राखूली,

राज, पलका में बंद कर राखुली।

ओ राज़, पलकां में बंद कर राखूंली।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।