नारी का भाग्य मैया तूने कैसा बनाया है

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॥ पावन पाठ ॥

नारी का भाग्य मैया तूने कैसा बनाया है,

हर युग में दुनियाँ ने इसे कितना सताया है,

नारी का भाग्य मैया तूने कैसा बनाया है

सीता जैसी नारी को रावण ने सताया है,

उनके पति ने उनको वन वन में घुमाया है,

नारी का भाग्य मैया तूने कैसा बनाया है,

मीरा जैसी नारी को, राणा ने सताया है,

उनके पति उनको प्याला, विष का पिलाया है,

नारी का भाग्य मैया, तूनें कैसा बनाया है,

अहिल्या जैसी नारी को इंद्र ने सताया है,

उनके पति ने उनको पत्थर का बनाया है,

नारी का भाग्य मैया, तूनें कैसा बनाया है,

द्रोपदी जैसी नारी को कौरवों ने सताया है,

उनके पति ने उनको देखो जूएं में हराया है,

नारी का भाग्य मैया, तूनें कैसा बनाया है,

कलयुग में नारी को दहेज़ ने सताया है,

उनके पति ने उनको देखो जिन्दा जलाया है,

नारी का भाग्य मैया, तूनें कैसा बनाया है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।