लेहर लेहर लहराए चुनरिया

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

इंद्र ने घोटा धाक दिया है इन्दरानी ने तारे

ओड चुनरिया मैया निकली धरती रूप निहारे

लेहर लेहर लहराए चुनरिया,

इस चुनरिया को देवो ने सतरंगी कर ढाला

लक्ष्मी जी ने माँ के गले में ढाली पुष्प की माला

धरती झूमे अम्बर नाचे झोंके पवन के गाये

लेहर लेहर लहराए चुनरिया,

माँ की चुनरी देख के ब्रह्मा पुष्पों की वर्षा करते,

देवी देवता मिल कर सारे माँ का वंदन करते

माँ बलशाली पालन हारी रुद्रानी कल्याणी

लेहर लेहर लहराए चुनरिया,

इस चुनरी को शिव शंकर ने खुशबु में डुबोया है,

इस चुनरी को माँ गोरी ने गंगा जल में धोया है

इंद्र दनुष के रंगों सी ही लगती दुर्गा प्यारी

लेहर लेहर लहराए चुनरिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।