डमरू वाले बाबा का है नहीं कोई सानी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

डमरू वाले बाबा का है नहीं कोई सानी

सांचा तेरा नाम बाकी दुनिया आनी जानी

डमरू वाले बाबा का है नहीं कोई सानी

भोले को मनाने को परदोष व्रत होता है,

जो भी इसे करे उसे भोला वर देता है

इसके परभाव से हो दूर परेशानी

डमरू वाले बाबा का है नहीं कोई सानी

सोल्हा सोमवार की है महिमा न्यारी

जिस ने किया है उसकी विपदा हारी

देदे उसे जो भी मांगे भोला महादानी

डमरू वाले बाबा का है नहीं कोई सानी

कुछ ना बने तुम शिव रात्री करलो,

महा शिवरात्री का उपवास धर लो

पीड़ा सारी हर लेंगे भोले अंतर यामी

डमरू वाले बाबा का है नहीं कोई सानी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।