गोविंदा आला रे आला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गोविंदा आला रे आला

ज़रा मटकी संभाल बृजबाला

अरे एक दो और तीन चार

संग पाँच छः सात हैं ग्वाला

गोविंदा आला रे आला

ज़रा मटकी सम्भाल बृजबाला

आई माखन के चोरों की सेना

ज़रा बच के सम्भल के जी रहना

बड़ी नटखट है फ़ौज,

कहीं आई जो मौज

नहीं बचने का..

नहीं बचने का कोई भी ताला ताला

गोविंदा आला रे आला

ज़रा मटकी सम्भाल बृजबाला

हो कैसी निकली है झूम के ये टोली

आज खेलेगी दूध से ये होली

भीगे कितना भी अंग

ठंडी हो ना उमंग

पड़े इनसे..

पड़े इनसे किसी का न पाला पाला

गोविंदा आला रे आला

ज़रा मटकी सम्भाल बृजबाला

गोविंदा आला रे आला

ज़रा मटकी सम्भाल बृजबाला

अरे एक दो और तीन चार

संग पाँच छः सात हैं ग्वाला

गोविंदा आला रे आला

ज़रा मटकी सम्भाल बृजबाला

गोविंदा आला रे आला

ज़रा मटकी सम्भाल बृजबाला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।