रमझम रैल चलाई रे जोगिया

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॥ पावन पाठ ॥

रमझम रैल चलाई रे जोगिया,

रमझम रैल चलाई,

उड़े आकाशा माई रे जोगिया,

उड़े पवन रे माहीं,

किया घरा में जाई रे जोगिया,

किया घरा में जाई,

रमझम रेल चलाई,

रमझम रैल चलाई रे जोगिया

थरुं टिकट कोई ना लेवे,

अध बिच उतर जाई,

रमझम रेल चलाई रे जोगिया,

रमझम रैल चलाई रे जोगिया

इण गाड़ी में चोर बिराजै,

सेठ साहूकार माहिं,

पाँच चोरा रो करो जाप्तो,

गाड़ी लूट ने ले जाई,

रमझम रेल चलाई रे जोगिया,

रमझम रैल चलाई रे जोगिया

हम हम करता हाकम चढ़ीया,

सत री फौज बणाई,

प्रेम पुलिसिया साथ में लीना,

इण गाड़ी रे माई,

रमझम रेल चलाई रे जोगिया,

रमझम रैल चलाई रे जोगिया

हद में गाड़ी करे हुकाटा,

बेहद गाड़ी आई,

दोय कर जोड़ प्रीत राम जी बोले,

सीधी लेण बताई,

रमझम रेल चलाई रे जोगिया,

रमझम रैल चलाई रे जोगिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।