पेशी आ गई तीन पहाड़ पे,

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

पेशी आ गई तीन पहाड़ पे,

ओ बालाजी मेरी जान बचा ले,

संकट वैरी मेरे ला रेहां से फांसी

लोग करे से देख ले हासी

हो बाला जी क्यों न बंध लगाले

तेरे भरोसे पड़ी ज्योत पे ठोकर खा ले मन्ने बहुत बे

हो बाला जी मेरी जान बचा ले

टूटीया जा से घात मेरा हो सब ने छोड़ेया साथ मेरा हो

हो बाला जी मेरा दर्द बटा ले

पेशी आ गई तीन पहाड़ पे , ओ बालाजी मेरी जान बचा ले

सोनू महाराज तने याद करे से

अशोक भगत तेरा ध्यान धरे से

हो बाला जी मन्ने चरना में ला ले

पेशी आ गई तीन पहाड़ पे , ओ बालाजी मेरी जान बचा ले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।