ये तन क्या है इक पिंजरा है

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॥ पावन पाठ ॥

ये तन क्या है, इक पिंजरा है,

इस पिंजरे में, इक तोता है,

ये तोता जब उड़ जाएगा,

तो खाली पिंजरा रह जाएगा,

ये तन क्या है, इक पिंजरा है,

इस पिंजरे में, इक तोता है।

दुनिया वालों, ए दुनियाँ वालों,

दुनिया मुसाफिर खाना है,

जो आज आए हैं,

कल उन्हें वापस जाना है,

जग जोगी वाला फेरा है,

ना तेरा है ना मेरा है,

ये तन क्या है, इक पिंजरा है,

इस पिंजरे में, इक तोता है।

जब तक इस, ओ जब तक,

इस तोते का यहाँ पर दाना है,

तब तक इस पिंजरे में जन्म बिताना है,

जब दाना ही मुक जाएगा,

तो खाली पिंजरा रह जाएगा,

ये तन क्या है, इक पिंजरा है,

इस पिंजरे में, इक तोता है।

ये पिंजरा हुआ पुराना,

ओ ये पिंजरा हुआ पुराना,

पंछी छोड़ चला,

और कई जन्मों के,

रिश्ते नाते तोड़ चला,

जब पंछी ही उड़ जाएगा,

तो खाली पिंजरा रह जाएगा,

ये तन क्या है, इक पिंजरा है,

इस पिंजरे में, इक तोता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।