कबीर हम सब पैदा हुए

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॥ पावन पाठ ॥

कबीर हम सब पैदा हुए,

और जग हँसा हम रोय,

ऐसी करनी कर चलो,

हम हँसे जग रोय।

तेज सके तो चेत बावळा,

घंटी लारली बाजी,

बीरा म्हारां जग सपना री बाजी।

सपने रंक राजा बण बैठ्यो,

घर हस्ती सुर ताजी,

बतरस भोजन थाल सोवणा,

भाँत भाँत री भाजी,

ओ बीरा म्हारां जग सपना री बाजी।

सपने पुत्र बांझड़ी जायो,

मंगल गायो हुई राजी,

जाग उठी जब बुद्धि निपूती,

घणा ऊदासी मांझी,

ओ बीरा म्हारां जग सपना री बाजी।

वेद पुराण और भागवत गीता,

पढ़ रहे पंडित काजी,

देव लोक देव और दानव,

बड़े बड़े राजाजी,

ओ बीरा म्हारां जग सपना री बाजी।

रजू में सरप सीप में रूपा,

यूँ जग मीथ्या बाजी,

चरण दास संता रे शरणे,

राम भजो सो राजी,

ओ बीरा म्हारां जग सपना री बाजी।

तेज सके तो चेत बावळा,

घंटी लारली बाजी,

बीरा म्हारां जग सपना री बाजी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।