शिव सत्य रूपं शिव साकार है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव सत्य रूपं शिव साकार है,

बरम सव्र्रुपम शिव निरा कार है

शिव के दर्शन पायो भोला मेरे मन भायो

शिव है तुझमे शिव है मुझ में हर घर आँगन में

इस धरती से उस अम्बर तक श्रृष्टि के कण कण में

अधि से अंत तक शिव ही शिव है

शून्य से अनंत तक शिव ही शिव है

शिव के दर्शन पायो भोला मेरे मन भायो

भोले भंडारी की छवि न्यारी बसी है जन जन में

सर्प लपेटे भस्म लगाये शिव अपने तन में

सब देवो में सव से अलग है अपनी धुन में मस्त मलंग है

शिव के दर्शन पायो भोला मेरे मन भायो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।