क्योंकि मेरे संग संग हैं नाकोड़ा भैरवनाथ

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॥ पावन पाठ ॥

रंग हैं, उमंग हैं, तरंग हैं, आनंद हैं,

क्योंकि मेरे संग संग हैं नाकोड़ा भैरवनाथ ।

लगन हैं, मगन हैं, जीवन चमन हैं,

क्योंकि मेरे संग संग हैं नाकोड़ा भैरवनाथ ॥

बड़े कृपालु, बड़े दयालु हैं ये भैरवनाथ,

चिंता चुरे, वांछित पुरे, भर भर दे सौगात ।

दुखड़े मिटाते, सुख बरसाते, इनकी अलग हैं बात,

हाथ पकड़ ले तो नहीं छोड़े भक्तों का ये साथ ॥

चरण शरण हैं, नहीं कोई गम हैं,

क्योंकि मेरे संग संग हैं नाकोड़ा भैरवनाथ..

जब से जीवन मे आए हैं भैरूजी सरकार,

आंगन मेरा महक रहा हैं, चहक रहा परिवार ।

आई हैं लाली चेहरे पर, खील गई हैं मुस्कान,

बरस रही खुशियां जीवन मे, बरस रहा धन-धान ॥

भक्तों पे मेहर हैं, लीला लहर हैं,

क्योंकि मेरे संग संग हैं नाकोड़ा भैरवनाथ..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।