छोटे से टूटे से इस घर मे आएं हैं बालाजी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

छोटे से टूटे से इस घर मे आएं हैं बालाजी,

देख लो आके जग वालों अंजनी लाला जी,

अपने हाथों भोग लगाऊँ, बालाजी,

रूखा सूखा जो है खिलाऊँ, बालाजी,

मेरे मन के मंदिर में तू है, बालाजी,

सोच मुझे पागल ये दुनिया, है हँसी,

जय बाला, कर दया हे, बाला,

मेरे मन के मंदिर में तू है, बालाजी,

सोच मुझे पागल ये दुनिया, है हँसी,

जय बाला, कर दया, हे बाला,

पूजा जानूँ ना साधना जानूँ ना,

कैसे तेरा सत्कार में करूँ,

जी ये चाहे है तुझको बिठा के आज,

अपने हाथो ये श्रृंगार में करूँ,

देख तुझे सामने होश खो सा जाय,

क्या करूँ क्या नहीं मन समझ ना पाय,

तू जो कहे मुझसे करूँ आज मैं वही,

सोच मुझे पागल ये दुनिया, है हँसी,

जय बाला, कर दया, हे बाला।

पाई कभी ना माँ की ममता,

जो थे अपने मुख मोड़ वो चले,

मैंने तुझे ही अपना माना हैं,

टूट जाऊँ जो छोड़ तू चले,

मुझे तेरा प्यार हरेक रूप में मिले,

जीवन की धूप और छाँव में मिले,

तेरे सिवा मेरा कोई और है नहीं,

सोच मुझे पागल ये दुनिया, है हँसी,

जय बाला, कर दया, हे बाला।

छोटे से टूटे से इस घर में,

आएं हैं बालाजी,

देख लो आके जग वालों,

अंजनी लाला जी,

अपने हाथों भोग लगाऊँ, बालाजी,

रूखा सूखा जो है खिलाऊँ, बालाजी,

मेरे मन के मंदिर में तू है, बालाजी,

सोच मुझे पागल ये दुनिया, है हँसी,

जय बाला, कर दया हे, बाला,

मेरे मन के मंदिर में तू है, बालाजी,

सोच मुझे पागल ये दुनिया, है हँसी,

जय बाला, कर दया, हे बाला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।