झंडा फ़हराओ केसरिया

पारंपरिक
अन्य आरती जैन भजन aarti
॥ पावन पाठ ॥

झंडा फ़हराओ केसरिया,

पारस जी को झूम झूम के,

झंडा फ़हराओ रै केसरिया,

पारस जी को झूम झूम के।

शिखर में भव जल कलशा चढ़ाएं,

भक्ति भाव से ध्वजा लहराएं,

झूम झूम के, झूम झूम के,

झंडा फ़हराओ रै केसरिया,

पारस जी को झूम झूम के।

भक्ति आराधन कर ध्यान लगाएं,

आरती कर और चन्दन लगाएं,

झूम झूम के, झूम झूम के,

झंडा फ़हराओ रै केसरिया,

पारस जी को झूम झूम के।

मूरत तेरी प्रभु तेरी मन में बसाएं,

सम्मित शिखर जी दर्शन को आएं,

झूम झूम के, झूम झूम के,

झंडा फ़हराओ रै केसरिया,

पारस जी को झूम झूम के।

स्वर्ण कूट पर पारस हमारे,

पर्वत पर्वत गूंजे जयकारे,

झूम झूम के, झूम झूम के,

झंडा फ़हराओ रै केसरिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।