साई नवाजिश

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॥ पावन पाठ ॥

मेरी जफ़ा पे भी मुस्कुराते है,

और वफ़ा पे भी मुस्कुराते है ।

मुझसे प्यार है उनका,

वो मेरे हर ऐब को छुपाते है ।

मुझे तो एहसास है कुछ वो,

के मेरे पासआते है ।

उन्हें खबर लगे कोई,

के ,मेरा दिल नहीं बस में,

तब अपने दिल को निकाल के,

वो मेरे पास लाते हैं ।

सिखाते हैं वो करुणा प्रेम,

एक दिन सीख जाऊंगा ।

वो मुझको प्यार करने,

की पुरानी ऋतु बताते है ।

साईआशीष कैसे शुक्र हो,

उनकी नवाज़िश का ,

वो मूरत बनके खुद ही,

खुद से खुद को बेच आते है ।

जिधर भी देखता हूँ,

देखती है उनकी नज़रे बस,

मै कैसे कहदो के मुझको,

कभी वो भूल जाते है ।

आये है आज भी पहलु,

में लेके मेरे दर्दो को,

मैने पूछा तो मेरे दर्द,

को अपना बताते है ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।