भरोसा रख साईं नाथ पर

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी बिगड़ी को साईं ही बनायेगे भरोसा रख साईं नाथ पर

वो ही तुझको गले से लगाये गे भरोसा रख साईं नाथ पर

तेरी बिगड़ी को साईं ही बनायेगे......

करले इबादत इनकी बंदे कट जायेगे जग के फंदे

सब कुछ कर दे साईं हवाले छोड़ के सारे गोरख धंदे

वो ही डुबो को पार लगाये गे भरोसा रख साईं नाथ पर

वो ही तुझको गले से लगाये गे भरोसा रख साईं नाथ पर

तेरी बिगड़ी को साईं ही बनायेगे......

द्वार साईं का सब से आला साईं सबका है रखवाला

शिर्डी का जोगी है लेकिन पूरी मुरादे करने वाला

वो ही आशा के दीप जलायेगे भरोसा रख साईं नाथ पर

वो ही तुझको गले से लगाये गे भरोसा रख साईं नाथ पर

तेरी बिगड़ी को साईं ही बनायेगे......

छोड़ के झूठा सारा जमाना हो जा बंदे साईं दीवाना,

आकर शिर्डी देख जरा तू मिल जाएगा साईं खजाना

तेरी आँखों से आंसू चुराए गे भरोसा रख साईं नाथ पर

वो ही तुझको गले से लगाये गे भरोसा रख साईं नाथ पर

तेरी बिगड़ी को साईं ही बनायेगे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।