डाली कर जोड़ सुनावे निज सतगुरु ने समझावे

पारंपरिक
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

डाली कर जोड़ सुनावे निज सतगुरु ने समझावे,

हो म्हारा बाप जी मैं तो लेउला समाधि थांसू पहली

राम सरोवर उबा रुणेचे रा राजा,

समाधि छीणिजे बाजे एक टंग का बाजा,

डाली कर जोड़ सुनावे निज सतगुरु ने समझावे,

हो म्हारा बाप जी मैं तो लेउला समाधि थांसू पहली

कांई तो सैनाणी डाली समाधि री थारी,

रामदेजी बोल्या मैं तो शंका हैं म्हारी,

डाली कर जोड़ सुणावै निज सतगुरु ने समझावे,

हो म्हारा बाप जी मैं तो लेउला समाधि थांसू पहली

आटी डोरा कांगसी सैनाणी बतावे,

समाधि में तीनों चीजो रामदेजी पावे,

डाली कर जोड़ सुनावे निज सतगुरु ने समझावे,

हो म्हारा बाप जी मैं तो लेउला समाधि थांसू पहली

भादवे री दशमी डाली समाधि हैं लीनी,

समाधि गुरु रे जोड़े ऐड़ी भगति कीनी,

डाली कर जोड़ सुनावे निज सतगुरु ने समझावे,

हो म्हारा बाप जी मैं तो लेउला समाधि थांसू पहली

डाली कर जोड़ सुनावे निज सतगुरु ने समझावे,

हो म्हारा बाप जी मैं तो लेउला समाधि थांसू पहली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।