यहां रहना नही देश बिराना है

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॥ पावन पाठ ॥

यहां रहना नही देश बिराना है

यहां रहना नहीं देस बिराना है

वीराना है, हो विराना है

यहां रहना नहीं देस बिराना है

यह संसार कांच वाली चूड़िया है

लागे टकोरो झड जाना है

यहां रहना नहीं देस बिराना है

यह संसार माटी वालों ढेलो है

बूंद पड़े गल जाना है

यहां रहना नहीं देस बिराना है

यह संसार झाड़ और झाकड़ है

आग लगे जल जाना है

यहां रहना नहीं देस बिराना है

कहे हो कबीर सुनो भाई साधो है

करनी का फल यहीं पाना है

यहां रहना नहीं देस बिराना है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।