जा टूट भरम के ताले

‘‘राम किशन वशिष्ट ’’
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॥ पावन पाठ ॥

जा टूट भरम के ताले तू पूंजी ला गुरु ज्ञान की ।

जा टूट भरम के ताले तू पूंजी ला गुरु ज्ञान की।।

सच्चे मन से ध्यान धरे तू कोन बतावे घाट तने ।

कर बुद्धि की सुधि मिलजा ईश्वर यो कदे घाट तने ।

तू सूरत भजन में लाले फिर मेर करे भगवान की ।

जा टूट भरम के ..............................ज्ञान की ॥

जिव सताना झुलम कमान के मिलजा इंसान तने ।

दिन रात कमाया हाथ न आया भजा नहीं भगवान् तने।

यमदूत आवे विकरालै तने चिंता हो जा ज्ञान की ।

जा टूट भरम के .............................ज्ञान की॥

फिर पाछे पछतावे गा मैने क्यू ना अच्छा करम करा।

सुते बैठे हो जब चिड़िया चुगले खेत तेरा ।

यमदूत आवे विकराले तने हो जा चिता ज्ञान की।

जा टूट भरम के ..............................ज्ञान की ॥

गुरु तार दे पार बन्दे चरणा के मा लागे न।

फेर दुबारा टाइम मिल ना वक्त परा हैं जागे न।

कृष्ण लाल गिरावड़ आले कर सेवा चंदरभान की ।

जा टूट भरम के ..........................ज्ञान की ॥

‘‘ जा टूट भरम के ताले तू पूंजी ला गुरु ’’

स्वर -‘‘ भगत रामनिवास ’’

लेखक - ‘‘राम किशन वशिष्ट ’’

पोस्ट करने वाले --- ‘‘भगत अनिल भारद्वाज’’

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।