भव से पार उतारो बाबा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

भव से पार उतारो बाबा मुझको प्यार से निहारो बाबा

तेरी शरण में मैं भी आऊ मुझको कभी उतारो बाबा

भव से पार उतारो बाबा .........

कत्या का तुमने कष्ट मिटाया फैजा तू ने कर्ज चुकाया

तुम ने सब को है अपनाया मुझको भी सविकारो बाबा

भव से पार उतारो बाबा .........

मंदिर में कुरान पड़ाई मस्जिद में धुनी जग्वाई

सब की बिगड़ी बात बनाई मेरे भग्य सवारों बाबा

भव से पार उतारो बाबा .........

मुर्ख ये जो नादानी से तेल दिया नही मन मानी से,

रौशनी किये दीये पानी से मेरा घर उजारो बाबा

भव से पार उतारो बाबा .........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।