पंछीड़ा लाल आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पंछीड़ा लाल आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी,

ईश्वर ने तू भूल गयो रै लख चौरासी काटी,

पंछीड़ा लाल आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी,

गर्भवास में दुःख पायो थारे घणां दीना री घाटी,

बाहर आय राम ने भूल्यों उल्टी पढ़ ली पाटी,

पंछीड़ा लाल आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी,

जीव जन्तु ने खाय खाय ने बदन बणायो बाटी,

अपने स्वारथ कारणे ने लाखा री गर्दन काटी,

पंछीड़ा लाल आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी,

माखन बेच्यो दहिड़ो बेच्यो बेचीं छाछ री छांटी,

माया ने ले घर में बूरी ऊपर लगा दी टाटी,

पंछीड़ा लाल आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी,

आया गया थारा मेहमाना ने घाले चूरमो बाटी,

भूखा प्यासा साधुड़ा ने घाले राबड़ी खाटी,

पंछीड़ा लाल आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी,

कहत गुलाब सुणो रे भाई संतो लख चौरासी काटी,

आखिर थाने जाणों पड़सी जम रा ज्यारी घाटी,

पंछीड़ा लाल आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी।

दमडो रा लोभी आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी।

पंछीड़ा लाल आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी,

ईश्वर ने तू भूल गयो रै लख चौरासी काटी,

पंछीड़ा लाल आछी पढ़ियो रे उलटी पाटी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।