ॐ जय साईं हरे बाबा शिरडी साईं हरे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय साईं हरे बाबा शिरडी साईं हरे,

भक्तजनों के कारण उनके कष्ट निवारण,

शिरडी में अवतरे ॐ जय साईं हरे,

ॐ जय साईं हरे…

दुखियन के सब कष्टन काजे, शिरडी में प्रभु आप विराजे,

फूलों की गल माला राजे कफनी, शैला सुन्दर साजे,

कारज सब के करें ॐ जय साईं हरे ,

ॐ जय साईं हरे…

काकड़ आरत भक्तन गावें गुरु शयन को चावड़ी जावें,

सब रोगों को उदी भगावे गुरु फकीरा हमको भावे,

भक्तन भक्ति करें ॐ जय साईं हरे,

ॐ जय साईं हरे…

हिन्दु मुस्लिम सिक्ख इसाईं बौद्ध जैन सब भाई भाई,

रक्षा करते बाबा साईं शरण गहे जब द्वारिकामाई,

अविरल धूनि जरे, ॐ जय साईं हरे,

ॐ जय साईं हरे…

भक्तों में प्रिय शामा भावे हेमडजी से चरित लिखावे,

गुरुवार की संध्या आवे शिव, साईं के दोहे गावे,

अंखियन प्रेम झरे ॐ जय साईं हरे ॥

ॐ जय साईं हरे…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।