जाहा बाजे साईं धुनी वाहा कोई कमी नही

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जाहा बाजे साईं धुनी वाहा कोई कमी नही

आनंद में है सारे मुशकिल में कोई नही,

आये है तेरे द्वारे हम आँखे मल मल कर

अब वक़्त है जागने का सोने की घडी नही

जाहा बाजे साईं धुनी वाहा कोई कमी नही

किस्मत ने है साईं मिलाया जन्मो का है चक्कर कटाया,

जब थामा है इक बार उसने तुझे छोड़े गे कभी नही

जाहा बाजे साईं धुनी वाहा कोई कमी नही

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।