आजाओ जगदम्बे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आजाओ जगदम्बे , तेरे भगत खड़े तेरे द्वार,

पुकारें तुमको बारम्बार।आजाओ मां जगदम्बे,

तुम मैया हम बालक तेरे,कष्ट ,हरो सब मैया मेरे,

तड़फत हूँ में सांझ सबेरे,आजाओ मा जगदम्बे,

बार बार तेरा रूप निरखते ,फिर भी न ये नैना थकते,

साल महीने से पल कटते,आजाओ मां जगदम्बे,

पूजा अर्चना में क्या जानू, तू है माँ बस इतना जानू,

तुमको अपना सबकुछ जानू, आजाओ मां जग्दम्बे,

मातु भवानी दुर्गे मैया,पार करो मेरी जीवन नैया,

तुम बिन दूजा कौन खिबैया,आजाओ मां जग्दम्बे,

जय जय जय जग्दम्बे माता,दरश बिना मनवा आकुलता,

आजा आ राजेन्द्र बुलाता,आजाओ मां जगदम्बे ,

गीतकार/गायक --राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।