सतगुरू तुम्हारी यादें पल पल रुला रही है

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॥ पावन पाठ ॥

सतगुरु तुम्हारी यादें पल पल रुला रही है

कब आओगे ये अखियां आंसू बहा रही है

चिट्ठी न कुछ संदेसा पैगाम कुछ न तेरा

वीरान हो गए हम तड़प रहा मोटेरा

मंजिल नही कोई अब हमें नज़र आ रही है

कब आओगे ये अखियां आंसू बहा रही है

खो गयी हंसी हमारी छिन गए सभी उजाले

किसको दिखाए सतगुरू अपने ये दिल के छाले

कुछ तो जुदाई तेरी कुछ दुनिया सता रही है

कब आओगे ये अखियां आंसू बहा रही है

वेजान हो गयी है अब ज़िंदगी हमारी

वेचैन रोज करती यादें हमे तुम्हारी

आ जाओ अब तो सतगुरु साधक बुला रहे हैं

कब आओगे ये अखियां आंसू बहा रही है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।