सोनै साँवरे तोजिद जान वार सुटटीऐ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सोनै साँवरे तोजिद जान वार सुटटीऐ

जिद वार सुटटीऐ जान वार सुटटीऐ

हारावाले तो जिद जान वार सुटटीऐ

साडी गली सौदागर आया वेचन मोती सच्चे

ओईयो मोती लै सकदे ने भाग जिना दे ऊचे

सुचे मोती लैके साँवरे दा हाल पूछिऐ

सोने साॅवरे तो जिद जान वार सुटटीऐ

शाम मेरे मयखाना खोलया पर पर पीवा प्याले

ओईयो पैले पी सकदे ने जेडे करमावाले

पयाला पी के हरि नाम दिया मौजा लुटिऐ

सोने साॅवरे तो जिद जान वार सुटटीऐ

सारी सखियाँ रल मिल कैनदीया भगवे वस्त्र पाइऐ

भगवे वस्त्र पाके असी वृन्दावन नू जाईऐ

वृन्दावन जाके शाम नाल मौजा लुटिऐ

सोने साॅवरे तो जिद जान वार सुटटीऐ

अंखा नाल मेरे अंदर वडया दिल नू जख्मी कीता

इस छलिये नू दिल दे बैठी इसने कदर ना कीता

जख्मी दिला वाले हाल अंसा कीनू दसिऐ

सोने साॅवरे तो जिद जान वार सुटटीऐ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।