जगत सारा माँ की मन्नत है चरणों में जन्नत है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ में संसार समाया ऋषि मुनियों ने बतलाया

प्रभु ने खुद से भी है पुछा माँ है साथन बताया

जगत सारा माँ की मन्नत है चरणों में जन्नत है

ममता के मंदिर की है माँ सब से प्यारी मूर्त

भगवान नजर आता है जब देखू माँ की सूरत

माँ के पावन चरणों में सचा वैकुंठ समाया

इस प्यार भरी ममता को स्वयम नारायण ने पाया

जगत सारा माँ की मन्नत है चरणों में जन्नत है

जो भरी धुप में करदे अपनी आँचल की छाया

गोद में भर के तन को मेरा हर दोष मिटाया

जो खुद धरती पर सोये मेरे हर अष्ट को धोये

चाहे जो कष्ट उठाये संतान न भूखी सोये

जगत सारा माँ की मन्नत है चरणों में जन्नत है

अपने बच्चे के आंसू आँचल में अपने पिरोती

शब्दों में व्यान न होगा ऐसा अनमोल ये मोती

नैनो में शीतल धारा जैसे चमकीला तारा

थ्थ्ला जुबा को देती शब्दों की अविरल धारा

जगत सारा माँ की मन्नत है चरणों में जन्नत है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।