नन्हा सा फूल हु मैं चरणों की धुल हु मैं

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॥ पावन पाठ ॥

नन्हा सा फूल हु मैं चरणों की धुल हु मैं

आया हु मैं तो तेरे द्वार ओ मैया मेरी पूजा करो सवीकार,

मैं तो निरगुनिया हु बस इतनी बात है मेरे जीवन की डोरी अब तेरे हाथ है

थोडा सा गुण मिल जाए निर्धन को धन मिल जाए

मानु तुम्हारा उपकार,

ओ मैया मेरी पूजा करो सवीकार

सुन लो हमारी अर्जी मुझको कुछ ज्ञान दो जीवन को जीना सिखु ऐसा वरदान दो

सूरज की शान पाऊ चंदा सा मान पाऊ इतना सा देदो उपहार

ओ मैया मेरी पूजा करो सवीकार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।