मैंने पूछा हज़ारों बार मगर एक बार नहीं बोले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैंने पूछा हज़ारों बार मगर एक बार नहीं बोले

मेरे आंसू बहे हर बार मगर एक बार नहीं बोले

मैंने पूछा हज़ारों बार.................

जब रिश्ता ये मंज़ूर ना था तो क्यों मुझको अनाया था

जब साथ मेरा नहीं देना था क्यों मुझको गले लगाया था

क्या मेरा नहीं अधिकार मगर एक बार नहीं बोले

हारे के साथी हो तुम तो मुझे माँ ने बताया बचपन से

ज़रा याद करो वो वादा जो तुमने किया अपनी माँ से

क्यों हारून मैं ही हर बार मगर एक बार नहीं बोले

हारा हुआ जो भी आता है तेरे दर से जीत के जाता है

ये कहते दुनिया वाले हैं पर मुझको समझ नहीं आता है

मैं हार गया रे कई बार मगर एक बार नहीं बोले

तुम कोशिश कुछ भी कर लो प्रभु मैं द्वार तेरा ना छोडूंगा

अंतिम स्वासें जीवन की प्रभु मैं द्वार पे तेरे तोडूंगा

अन्नू जान लो तुम इस बार ये बातें झूठ नहीं बोले

मेरे आसनु हर बार मगर एक बार नहीं बोले

मैंने पूछा हज़ारों बार.................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।