तुम बसी हो कण कण अन्दर माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तुम बसी हो कण कण अन्दर माँ

तुम बसी हो कण कण अन्दर माँ

हम ढूंढते रह गये मंदिर में

हम मूढमति हम अनजाने

माँ सार तुम्हारा क्या जाने

तुम बसी हो कण-कण अन्दर माँ

हम ढूंढते रह गये मंदिर में

तेरी माया को न जान सके

तुझको न कभी पहचान सके

हम मोह की निद्रा सोये रहे

माँ इधर उधर ही खोये रहे

तू सूरज तू ही चन्द्रमा

तू सूरज तू ही चन्द्रमा

हम ढूंढते रह गये मंदिर में

तुम बसी हो कण-कण अन्दर माँ

हम ढूंढते रह गये मंदिर में

तुम बसी हो कण-कण अन्दर माँ

हम ढूंढते रह गये मंदिर में

हर जगह तुम्हारे डेरे माँ

कोई खेल न जाने तेरे माँ

इन नैनो को न पता लगे

किस रूप में तेरी ज्योत जगे

तू पर्वत, तू ही समंदर माँ

तू पर्वत, तू ही समंदर माँ

हम ढूंढते रह गये मंदिर में

तुम बसी हो कण-कण अन्दर माँ

हम ढूंढते रह गये मंदिर में

तुम बसी हो कण-कण अन्दर माँ

हम ढूंढते रह गये मंदिर में

कोई कहता तुम ही पवन में हो

और तुम ही ज्वाला अगन में हो

कहते है अम्बर और जमी

तुम सब कुछ हो, हम कुछ भी नहीं

फल फूल तुम्ही, हो तरुवर माँ

फल फूल तुम्ही, हो तरुवर माँ

हम ढूंढते रह गये मंदिर में

तुम बसी हो कण-कण अन्दर माँ

हम ढूंढते रहगये मंदिर में

तुम बसी हो कण-कण अन्दर माँ

हम ढूंढते रहगये मंदिर में

हम मूढमति हम अनजाने

माँ सार तुम्हारा क्या जाने

तुम बसी हो कण-कण अन्दर माँ

हम ढूंढते रह गये मंदिर में

तुम बसी हो कण-कण अन्दर माँ

हम ढूंढते रह गये मंदिर में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।