कान्हा मुरली से मीठी मीठी तान सुनावे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

यमुना किनारे पे नंद का लाला गईयां चरावे,

कान्हा मुरली से मीठी मीठी तान सुनावे

मुरली को सुन कर के सखिया हो गई रे दीवानी

सुध बुध बोली वो ऐसी होगी रे मस्तानी

राधे ने मुरली से कान्हा कैसा जादू पावे

कान्हा मुरली से मीठी मीठी तान सुनावे

कान्हा की मुरली की जब से तान पड़ी काननं में

दिल मुरली ले गई रे नींद ना आये रे नैन में

सुन कर के मुरली को सखिया आ गई यमुना किनारे

हो गई सब मत वाली देख कान्हा के नैन कजरारे

वृन्दावन में कान्हा सखियो के संग रास रचावे

कान्हा मुरली से मीठी मीठी तान सुनावे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।