का लेके शिव के मनाई हो शिव मानत नाही

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

का लेके शिव के मनाई हो शिव मानत नाही,

पुरी कचौड़ी से शिव के मनहू ना भावे

भांग धतूरा कहा पाइब हो शिव मानत नाही

का लेके शिव के मनाई हो शिव मानत नाही

शाला दुशाला शिव मन हू ना भावे

मृगा के छाल कहा पाइब हो शिव मानत नाही

का लेके शिव के मनाई हो शिव मानत नाही

मोटर गाड़ी शिव के मनहू ना भावे

बसहा बैल कहा पाइब हो शिव मानत नाही

का लेके शिव के मनाई हो शिव मानत नाही

कोठा अटारी शिव के मनहू ना भावे

टुटली मडइया कहा पाइब हो शिव मानत नाही

का लेके शिव के मनाई हो शिव मानत नाही

सोना के चैन शिव के मनहू ना भावे

सर्प के माला कहा पाइब हो शिव मानत नाही

का लेके शिव के मनाई हो शिव मानत नाही

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।