ओढ़ के लाल चुनरिया लाल

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओढ़ के लाल चुनरिया लाल मैं नाचू तेरे अंगना मे,

दर पे आऊ हर साल,

ओढ़ के लाल चुनरिया लाल मैं नाचू तेरे अंगना मे,

पाओ में अपने बांध के घुंगरू आखो पे तेरे नाम को सुमरू,

और बजाऊ खड़ताल मैं नाचू तेरे अंगना मे

ओढ़ के लाल चुनरिया लाल मैं नाचू तेरे अंगना मे,

बिन तेरे कोई सुन नही पाए,

बायकुल मेरा चैन न पाए,

दे दी संगता मैं नाचू तेरे अंगना मे

ओढ़ के लाल चुनरिया लाल मैं नाचू तेरे अंगना मे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।