गुरूजी संग है हर ख़ुशी अपनी

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॥ पावन पाठ ॥

अब तो गुरु जी संग है हर ख़ुशी अपनी

गुरु जी पे मरना है जिन्दगी अपनी

अब तो गुरु जी संग है हर ख़ुशी अपनी

आप के ज्ञान से गुरु जी सब पाप धुल गए

आये जब से आप जीवन में हम मस्त हो गये

तुझी से बाँधी है जीवन डोर अपनी

अब तो गुरु जी संग है हर ख़ुशी अपनी

जपता रहे दिल मेरा नाम आपका बार बार

सांझ सवेरे करता ये आप का दीदार

मन चाहे बात अब जितनी

अब तो गुरु जी संग है हर ख़ुशी अपनी

आप ने जो दिया है मुझको ख़ुशी का खजाना

उस के आगे अब लगता सब है बेगाना

प्रजा में रेहना है बंदगी अपनी

अब तो गुरु जी संग है हर ख़ुशी अपनी

आप से कहू क्या मैं गुरु जी क्या मैंने पा लिए

बोल सके न ये जुबान शुक्रिया कर दिया

चरणों में बीते साँसे हो जितनी

अब तो गुरु जी संग है हर ख़ुशी अपनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।