सरेया नालो वखरी बारात मेरे भोले दी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सरेया नालो वखरी बारात मेरे भोले दी

जग नालो वखरी बारात मेरे भोले दी

गड़ीया दी लोड नहियो नंदी बैल भोले दी

सरेया नालो वखरी बारात मेरे भोले दी

डम डम डमरू है भोले तेरा बजना

देवी देव्तेया नहियो न्च्देया थकना

फुला दीया बरखा माँ लक्ष्मी दे भोले जी

सरेया नालो वखरी बारात मेरे भोले दी

विच स्मशाना आके भोले डेरा ला लिया

वखरा ही रूप ओहदा वखरा कमाल आ

भुत ते प्रेत सारे महा देव भोले जी

सरेया नालो वखरी बारात मेरे भोले दी

गिल गुरु वेळ वेख भोले देया रंगा नु,

तारी जावी भोला मेरा मस्त मलंगा नु

विजय सूफी रेहन्दा शिव चरना दे कोले जी

सरेया नालो वखरी बारात मेरे भोले दी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।