चिंतपूर्णी आध भवानी चिंता मेरी दूर करो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चिंतपूर्णी आध भवानी चिंता मेरी दूर करो

दुख हरनी मेरे दिल डा कासा

सूखा नाल भरपूर करो

तेरा सिमरन तेरी पूजा चाहा शाम सवेरे माँ

शरधा वाली ज्योत जगा के गावा में गुन तेरे माँ

आपने नाम दी मस्ती चाढ के जीवन नुरो नूर करो

चिंतपूर्णी आध भवानी चिंता मेरी दूर करो

फुक दे मेरिया कुल बुराइया आंबे ज्योत ज्वाला माँ

अंधकार विच में न भटका मन विच करो उजाला माँ

अपनी ज्योति नाल भवानी जिंदगी नुरो नूर करो

चिंतपूर्णी आध भवानी चिंता मेरी दूर करो

कांगड़े वाली मैया हर दम दिल मेरा ऐ शाद रहे

शीतला देवी चामुंडा माँ चित विच तेरी याद रहे

चरना विच बिठा के मेनू मावा वाला दस्तूर करो

नैना देवी मेरेया नैना विच तेरी तस्वीर रहे

ऐसी किरपा करोमाँवैष्णो मेरी साफ जमीर रहे

केशो कहे में औगण हारा मेरे माफ़ कसूर करो

चिंतपूर्णी आध भवानी चिंता मेरी दूर करो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।