करके दर्शन परशन हुई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रास रचिया सावरे , मनमोहन गोपाल ,

लाज भक्त की राखते , माधव दीन दयाल,

करके दर्शन परशन हुई , हुआ हृदय में उजियाला

पत्थर के माह दिया दिखाई , मने मोहन मुरली वाला

हे री मन मोहन मुरली वाला………..

लोक लाज कुल की मर्यादा , तोड़ बगादी सर की

कुटुम्ब काबिल त्याग दिया , में तो बनी भक्तणी हर की

सेवा करके गिरधर की में……..

रोज पहरा दूँ माला

पत्थर के माह दिया दिखाई , मने मोहन मुरली वाला

हे री मन मोहन मुरली वाला………..

सोणी सूरत उमर है बाली , नाह धो तिलक लगावे

सब भक्ता के मिलके संग में , गुण गोविंद के गावे

मीरा को तो कुछ नही भावे……...

मन बस गया रूप निराला

पत्थर के माह दिया दिखाई , मने मोहन मुरली वाला

हे री मन मोहन मुरली वाला………..

घुघट परदा चुनरी भी मने , साड़ी खोल बगादी

भय की भूतनी दूर करी मनै , अड़े समाधि ला दी

फिर मोहन की जोत जगादी……….

में पी गई विष का प्याला

पत्थर के माह दिया दिखाई , मने मोहन मुरली वाला

हे री मन मोहन मुरली वाला………..

क्यू राणा की करे बड़ाई ,माँ कित तेरी अकल गई से

भर के वचन पलट जाना माँ , मानस का धर्म नही से

मीरा का तो पति सही से………….

बचपन का देखा भाला

पत्थर के माह दिया दिखाई , मने मोहन मुरली वाला

हे री मन मोहन मुरली वाला………..

उस दिन ने माँ भूल गई तू , सजी बारात फिरे थी

में भुझु मेरा पति कौन , गिरधर पे हाथ धरे थी

मीरा के ना बात जरह थी………..

कहे लखमी जाटी वाला

पत्थर के माह दिया दिखाई , मने मोहन मुरली वाला

हे री मन मोहन मुरली वाला………..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।